UPSC प्राचीन इतिहास | लगभग 1500 ईसा पूर्व - 600 ईसा पूर्व
वैदिक काल (Vedic Age) भारतीय इतिहास का वह काल है जब वेदों की रचना हुई। यह काल लगभग 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इस काल को आर्यों का काल भी कहा जाता है।
| पहलू | प्रारंभिक वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) | उत्तर वैदिक काल (1000-600 ई.पू.) |
|---|---|---|
| मुख्य ग्रंथ | ऋग्वेद (मंडल 2-7) | यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद |
| भौगोलिक क्षेत्र | सप्त सिंधु (सिंधु और उसकी सात सहायक नदियाँ) | गंगा-यमुना दोआब (पूर्व की ओर विस्तार) |
| जीवन शैली | पशुपालन प्रधान (गाय महत्वपूर्ण) | कृषि प्रधान, व्यापार भी |
| राजनीतिक संगठन | जनजातीय (Tribal), राजा गोपति (गायों का स्वामी) | जनपदों का उदय, राजा सम्राट कहलाने लगा |
| वर्ण व्यवस्था | जन्म पर आधारित नहीं, कर्म पर आधारित | जन्म पर आधारित चार वर्ण व्यवस्था |
| प्रमुख देवता | इंद्र (युद्ध के देवता), अग्नि, वरुण, सूर्य | ब्रह्मा, विष्णु, शिव, प्रजापति (नए देवता) |
| पूजा पद्धति | यज्ञ प्रमुख, प्राकृतिक शक्तियों की पूजा | यज्ञ जटिल हो गए, पुरोहित वर्ग का उदय |
📌 UPSC तथ्य: प्रारंभिक वैदिक काल को ऋग्वैदिक काल भी कहते हैं। उत्तर वैदिक काल में गंगा-यमुना क्षेत्र में विस्तार हुआ और जनपदों का उदय हुआ।
| वेद | अर्थ | रचना काल | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| ऋग्वेद | "ऋचाओं का वेद" (ज्ञान) | 1500-1200 ई.पू. | सबसे प्राचीन, 1028 सूक्त, 10 मंडल, इंद्र और अग्नि की स्तुति |
| यजुर्वेद | "यज्ञ का वेद" | 1200-1000 ई.पू. | यज्ञों की विधियाँ, दो भाग - शुक्ल (सफेद) और कृष्ण (काला) |
| सामवेद | "गानों का वेद" | 1200-1000 ई.पू. | संगीत के मंत्र, ऋग्वेद के मंत्र गाए गए, भारतीय संगीत का आधार |
| अथर्ववेद | "अथर्वा ऋषि का वेद" | 1000-900 ई.पू. | जादू-टोना, आयुर्वेद, गृहस्थ जीवन के मंत्र |
| ग्रंथ | विवरण | समय |
|---|---|---|
| पुराण | 18 महापुराण, प्राचीन इतिहास, वंशावली, ब्रह्मांड विज्ञान}.\] td>500 ई.पू. - 500 ई. | |
| रामायण.\] td>वाल्मीकि द्वारा रचित, 24,000 श्लोक}.\] td>500 ई.पू. - 100 ई. | ||
| महाभारत.\] td>वेद व्यास द्वारा रचित, 1,00,000 श्लोक, विश्व का सबसे लंबा महाकाव्य}.\] td>400 ई.पू. - 400 ई. | ||
| स्मृतियाँ}.\] td>मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति — सामाजिक और धार्मिक नियम}.\] td>200 ई.पू. - 200 ई. | ||
| निरुक्त}.\] td>यास्क द्वारा रचित, वेदों के कठिन शब्दों की व्याख्या}.\] td>700-500 ई.पू. | ||
| शतपथ ब्राह्मण}.\] td>यजुर्वेद का ब्राह्मण, राजनीतिक और धार्मिक विवरण}. td>1000-800 ई.पू. |
📌 UPSC तथ्य: आर्य आक्रमण सिद्धांत (AIT) अब खारिज हो चुका है। आजकल आर्य प्रवास सिद्धांत (AMT) को अधिक मान्यता मिली है। ऋग्वेद में "आर्य" का अर्थ सांस्कृतिक और भाषाई है, नस्लीय नहीं।
| काल | समय | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| प्रारंभिक वैदिक काल (ऋग्वैदिक काल)}.\] td>1500-1000 ई.पू.}.\] td>ऋग्वेद की रचना, सप्त सिंधु क्षेत्र, पशुपालन, जनजातीय व्यवस्था | ||
| उत्तर वैदिक काल (बाद का वैदिक काल)}.\] td>1000-600 ई.पू.}.\] td>यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद; गंगा-यमुना क्षेत्र; कृषि; वर्ण व्यवस्था | ||
| महाजनपद काल}.\] td>600-300 ई.पू.}.\] td>16 महाजनपदों का उदय, बुद्ध और महावीर का काल |
📌 UPSC तथ्य: वैदिक काल का काल निर्धारण भाषाई, साहित्यिक और पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है। सरस्वती नदी का सूखना काल निर्धारण का एक महत्वपूर्ण आधार है।
प्रारंभिक वैदिक काल (1500-1000 ई.पू.) को ऋग्वैदिक काल भी कहा जाता है क्योंकि इसी काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी। यह काल आर्यों के भारत आगमन या प्रवास के तुरंत बाद का है।
| पद/संस्था | विवरण |
|---|---|
| राजा (Raja)}. | जनजाति का मुखिया, वंशानुगत नहीं, सभा द्वारा चुना जाता था। राजा को गोपति (गायों का स्वामी) और वीरपति (योद्धाओं का स्वामी) कहा जाता था। |
| सभा (Sabha)}. | ग्रामीण सभा, न्यायिक और प्रशासनिक कार्य। इसमें महिलाएँ भी शामिल हो सकती थीं। |
| समिति (Samiti)}. | जनजातीय सभा, राजा के चुनाव और युद्ध के निर्णय। यह सबसे महत्वपूर्ण संस्था थी। |
| विदथ (Vidatha)}. | जनजातीय संगठन, धार्मिक, सैन्य और नागरिक कार्य। |
| ग्राम (Gram)}. | गाँव का मुखिया ग्रामणी कहलाता था। |
📌 UPSC तथ्य: प्रारंभिक वैदिक काल में कोई कर व्यवस्था नहीं थी, कोई स्थायी सेना नहीं थी, राजा वंशानुगत नहीं था। सबसे महत्वपूर्ण संस्था समिति थी।
| वर्ग | विवरण |
|---|---|
| ब्राह्मण | पुरोहित वर्ग — यज्ञ कराने वाले, शिक्षक |
| क्षत्रिय | राजा और योद्धा वर्ग |
| वैश्य | किसान, पशुपालक, व्यापारी |
| शूद्र.\] td>प्रारंभिक वैदिक काल में कोई उल्लेख नहीं (बाद में आए) |
📌 UPSC तथ्य: प्रारंभिक वैदिक काल में गाय (गो) धन का माप थी। युद्ध का मुख्य उद्देश्य गौ-हरण था। राजा गोपति कहलाता था। ऋग्वेद में गाय को अघन्या (अवध्य) कहा गया है।
| देवता | विवरण | ऋग्वेद में सूक्त |
|---|---|---|
| इंद्र}. | युद्ध और वर्षा के देवता, सबसे महत्वपूर्ण, वृत्रासुर का वध करने वाले}. | 250 सूक्त (सबसे अधिक) |
| अग्नि}. | अग्नि के देवता, यज्ञों के माध्यम, देवताओं और मनुष्यों के बीच संवाद}. | 200 सूक्त |
| वरुण}. | जल और ऋत के देवता, नैतिक व्यवस्था के रक्षक}. | कम सूक्त |
| सोम}. | सोम रस के देवता, यज्ञों में पिया जाता था}. | कम सूक्त |
| सूर्य}. | सूर्य देवता, प्रकाश के दाता}. | कम सूक्त |
| उषा}. | उषा (भोर) की देवी, एकमात्र प्रमुख देवी}. | कम सूक्त |
| पृथ्वी}. | पृथ्वी देवी, माता के रूप में}. | कम सूक्त |
| रुद्र}. | बाद में शिव के रूप में विकसित, इस काल में गौण}. | कम सूक्त |
| विष्णु}. | बाद में प्रमुख, इस काल में गौण}. | कम सूक्त |
| स्थल/संस्कृति | क्षेत्र | समय | महत्व |
|---|---|---|---|
| पेंटेड ग्रे वेयर (PGW)}. | गंगा-यमुना दोआब, राजस्थान, पंजाब}. | 1200-600 ई.पू.}. | उत्तर वैदिक काल से जुड़े मिट्टी के बर्तन, लोहे के उपयोग के प्रमाण |
| ओचर कलर्ड पोटरी (OCP)}. | गंगा-यमुना दोआब, राजस्थान}. | 2000-1500 ई.पू.}. | प्रारंभिक वैदिक काल से पहले की संस्कृति, ताम्र-पाषाण कालीन |
| आहड़ संस्कृति}. | राजस्थान (उदयपुर के पास)}. | 2000-1500 ई.पू.}. | ताम्र-पाषाण कालीन, चित्रित मिट्टी के बर्तन |
| गांधार कब्र संस्कृति}. | पाकिस्तान (पेशावर), स्वात घाटी}. | 1600-500 ई.पू.}. | घोड़े के अवशेष, आर्यों से संबंध माना जाता है |
| हस्तिनापुर}. | उत्तर प्रदेश (मेरठ के पास)}. | 1100-800 ई.पू.}. | PGW बर्तन, लोहे के उपकरण, बाढ़ के प्रमाण |
| अटरनजी खेड़ा}. | उत्तर प्रदेश (हरदोई)}. | 1000-600 ई.पू.}. | PGW बर्तन, लोहे के उपकरण |
| जाखेरा}. | उत्तर प्रदेश (इटावा)}. | 1200-800 ई.पू.}. | PGW बर्तन, लोहे के उपकरण |
| नोह}. | राजस्थान (भरतपुर)}. | 2000-1500 ई.पू.}. | OCP संस्कृति |
📌 UPSC तथ्य: पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) उत्तर वैदिक काल से जुड़ा है और लोहे के उपयोग के प्रमाण देता है। गांधार कब्र संस्कृति में घोड़े के अवशेष मिले हैं, जो आर्यों से जोड़े जाते हैं।
वैदिक साहित्य (Vedic Literature) विश्व के सबसे प्राचीन साहित्यों में से एक है। यह श्रुति (जो सुना गया) और स्मृति (जो याद किया गया) में विभाजित है।
| श्रेणी | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| श्रुति}. | "जो सुना गया" — अपौरुषेय (मानव कृत नहीं), ईश्वरीय ज्ञान}. | चारों वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद |
| स्मृति}. | "जो याद किया गया" — मानव कृत, वैदिक ज्ञान पर आधारित}. | वेदांग, पुराण, इतिहास (रामायण, महाभारत), धर्मशास्त्र |
📌 UPSC तथ्य: श्रुति (Sruti) को सबसे प्रामाणिक माना जाता है। स्मृति (Smriti) श्रुति पर आधारित है लेकिन मानव कृत है। उपनिषद श्रुति का अंतिम भाग है — वेदांत (Vedanta) कहलाता है।
| वेद | अर्थ | रचना काल | मुख्य विशेषताएँ | शाखाएँ |
|---|---|---|---|---|
| ऋग्वेद}. | "ऋचाओं का वेद" (ज्ञान)}. | 1500-1200 ई.पू.}. | सबसे प्राचीन, 1028 सूक्त, 10580 मंत्र, 10 मंडल, मंडल 2-7 सबसे प्राचीन (पारिवारिक), मंडल 1 और 10 बाद के, इंद्र और अग्नि की स्तुति}. | शाकल, बाष्कल, अश्वलायन, शांखायन |
| यजुर्वेद}. | "यज्ञ का वेद"}. | 1200-1000 ई.पू.}. | यज्ञों की विधियाँ और मंत्र, दो भाग — शुक्ल (सफेद) और कृष्ण (काला), शुक्ल में मंत्र और विधि अलग, कृष्ण में मिले-जुले}. | शुक्ल: माध्यंदिन, काण्व कृष्ण: तैत्तिरीय, मैत्रायणी, कठ, कपिष्ठल |
| सामवेद}. | "गानों का वेद"}. | 1200-1000 ई.पू.}. | संगीत के मंत्र, ऋग्वेद के मंत्र गाए गए (75% ऋग्वेद से), भारतीय शास्त्रीय संगीत का आधार, साम (गान) का ज्ञान}. | कौथुम, राणायनीय, जैमिनीय |
| अथर्ववेद}. | "अथर्वा ऋषि का वेद"}. | 1000-900 ई.पू.}. | जादू-टोना, आयुर्वेद, गृहस्थ जीवन के मंत्र, दैनिक जीवन, रोग, शत्रु, भूत-प्रेत के उपचार, आयुर्वेद के बीज}. | शौनक, पिप्पलाद |
| ब्राह्मण | संबंधित वेद | विवरण |
|---|---|---|
| ऐतरेय ब्राह्मण}. | ऋग्वेद}. | राजसूय और अश्वमेध यज्ञों का वर्णन, राजा की उत्पत्ति का सिद्धांत |
| शतपथ ब्राह्मण}. | यजुर्वेद (शुक्ल)}. | सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत ब्राह्मण, पुरुष सूक्त, प्रजापति, राजसूय, अश्वमेध का वर्णन, आर्यों का पूर्व विस्तार |
| तैत्तिरीय ब्राह्मण}. | यजुर्वेद (कृष्ण)}. | यज्ञों की विस्तृत व्याख्या |
| गोपथ ब्राह्मण}. | अथर्ववेद}. | अथर्ववेद का एकमात्र ब्राह्मण |
| पंचविंश ब्राह्मण}. | सामवेद}. | सामवेद का महत्वपूर्ण ब्राह्मण |
| आरण्यक | संबंधित वेद | विवरण |
|---|---|---|
| ऐतरेय आरण्यक}. | ऋग्वेद}. | महानाम्नी मंत्र, ब्रह्म और आत्मा का दर्शन |
| शांखायन आरण्यक}. | ऋग्वेद}. | महाव्रत अनुष्ठान |
| तैत्तिरीय आरण्यक}. | यजुर्वेद (कृष्ण)}. | यज्ञों का रहस्यमय अर्थ, प्राणोपासना |
| बृहदारण्यक}. | यजुर्वेद (शुक्ल)}. | यह आरण्यक और उपनिषद दोनों है, सबसे प्राचीन उपनिषद |
| उपनिषद | संबंधित वेद | विवरण |
|---|---|---|
| ईशोपनिषद}. | यजुर्वेद (शुक्ल)}. | सबसे छोटा, ईश्वर और संन्यास का दर्शन |
| केनोपनिषद}. | सामवेद}. | ब्रह्म का ज्ञान, इंद्र और उमा (पार्वती) का संवाद |
| कठोपनिषद}. | यजुर्वेद (कृष्ण)}. | नचिकेता और यम (मृत्यु के देवता) का संवाद, आत्मा अमर है |
| प्रश्नोपनिषद}. | अथर्ववेद}. | 6 प्रश्नों के उत्तर, प्राण और ब्रह्म का ज्ञान |
| मुण्डकोपनिषद}. | अथर्ववेद}. | परा और अपरा विद्या, ब्रह्म की प्राप्ति |
| माण्डूक्योपनिषद}. | अथर्ववेद}. | ॐ (OM) का दर्शन, चार अवस्थाएँ (जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति, तुरीय) |
| तैत्तिरीयोपनिषद}. | यजुर्वेद (कृष्ण)}. | अन्न, प्राण, मन, विज्ञान, आनंद — पाँच कोशों का सिद्धांत |
| ऐतरेयोपनिषद}. | ऋग्वेद}. | आत्मा की उत्पत्ति, प्रजापति द्वारा सृष्टि |
| छान्दोग्योपनिषद}. | सामवेद}. | तत्त्वमसि (Tat Tvam Asi) का महान वाक्य, उद्दालक और श्वेतकेतु का संवाद |
| बृहदारण्यकोपनिषद}. | यजुर्वेद (शुक्ल)}. | सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन उपनिषद, अहं ब्रह्मास्मि (Aham Brahmasmi), याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी का संवाद |
| श्वेताश्वतरोपनिषद}. | यजुर्वेद (कृष्ण)}. | रुद्र (शिव) को सर्वोच्च मानने वाला, भक्ति का प्रारंभिक रूप |
📌 UPSC तथ्य: 108 उपनिषद हैं, मुख्य 11। बृहदारण्यक उपनिषद सबसे प्राचीन और सबसे बड़ा है। छान्दोग्य उपनिषद में तत्त्वमसि (Tat Tvam Asi) का महान वाक्य है। श्वेताश्वतर उपनिषद में रुद्र (शिव) को सर्वोच्च माना गया है।
| वेदांग | अर्थ | विवरण |
|---|---|---|
| शिक्षा}. | ध्वनि विज्ञान}. | मंत्रों के उच्चारण के नियम, स्वर, व्यंजन, बलाघात |
| कल्प}. | अनुष्ठान विज्ञान}. | यज्ञों और संस्कारों के नियम, श्रौत सूत्र, गृह्य सूत्र, धर्म सूत्र, शुल्ब सूत्र |
| व्याकरण}. | भाषा विज्ञान}. | पाणिनि का अष्टाध्यायी — संस्कृत व्याकरण का सबसे प्राचीन ग्रंथ |
| निरुक्त}. | व्युत्पत्ति विज्ञान}. | यास्क द्वारा रचित, वेदों के कठिन शब्दों की व्याख्या, निघंटु (कोश) भी |
| छंद}. | छंद शास्त्र}. | मंत्रों के मात्रिक और वर्णिक छंदों का ज्ञान, गायत्री, अनुष्टुप, त्रिष्टुप, जगती छंद |
| ज्योतिष}. | खगोल विज्ञान}. | यज्ञों के लिए मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों का ज्ञान, लगध ऋषि का वेदांग ज्योतिष |
ब्राह्मणवाद (Brahmanism) उत्तर वैदिक काल में विकसित हुआ। यह वेदों, ब्राह्मणों और यज्ञों पर आधारित धार्मिक व्यवस्था थी।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मुख्य आधार}. | वेद, ब्राह्मण, यज्ञ |
| प्रमुख देवता}. | प्रजापति (ब्रह्मा), विष्णु, शिव (रुद्र), देवी |
| पूजा पद्धति}. | यज्ञ (Sacrifice) — मुख्य धार्मिक अनुष्ठान |
| पुरोहित वर्ग}. | ब्राह्मण सर्वोच्च स्थान पर, यज्ञों का एकाधिकार |
| वर्ण व्यवस्था}. | जन्म पर आधारित चार वर्ण (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) |
| प्रमुख यज्ञ}. | राजसूय, अश्वमेध, वाजपेय, अग्निष्टोम, सौत्रामणि |
📌 UPSC तथ्य: ब्राह्मणवाद में यज्ञ को सर्वोच्च धार्मिक कृत्य माना गया। ब्राह्मण वर्ग का उदय और प्रभुत्व इसी काल में हुआ। यह व्यवस्था बाद में हिंदू धर्म में विकसित हुई।
| महावाक्य (Mahavakya) | उपनिषद | अर्थ |
|---|---|---|
| प्रज्ञानं ब्रह्म}. | ऐतरेय उपनिषद (ऋग्वेद)}. | चेतना ही ब्रह्म है |
| अहं ब्रह्मास्मि}. | बृहदारण्यक उपनिषद (यजुर्वेद)}. | मैं ब्रह्म हूँ |
| तत्त्वमसि}. | छान्दोग्य उपनिषद (सामवेद)}. | तू वह है (आत्मा और ब्रह्म एक हैं) |
| अयमात्मा ब्रह्म}. | माण्डूक्य उपनिषद (अथर्ववेद)}. | यह आत्मा ही ब्रह्म है |
षड्दर्शन (छह दर्शन) भारतीय दर्शन की छह शास्त्रीय प्रणालियाँ हैं। ये सभी वेदों को प्रमाण मानते हैं (आस्तिक दर्शन)।
| दर्शन | प्रवर्तक | मुख्य ग्रंथ | मुख्य सिद्धांत |
|---|---|---|---|
| न्याय (Nyaya)}. | गौतम ऋषि}. | न्याय सूत्र}. | तर्कशास्त्र, प्रमाण (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द), मोक्ष के लिए सही ज्ञान आवश्यक |
| वैशेषिक (Vaisheshika)}. | कणाद ऋषि (उलूक)}. | वैशेषिक सूत्र}. | परमाणुवाद, 7 पदार्थ (द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय, अभाव), ब्रह्मांड परमाणुओं से बना |
| सांख्य (Samkhya)}. | कपिल ऋषि}. | सांख्य सूत्र}. | द्वैतवाद — पुरुष (चेतना) और प्रकृति (जड़ जगत), 25 तत्व, दुःख का कारण अज्ञान, ज्ञान से मोक्ष |
| योग (Yoga)}. | पतंजलि}. | योग सूत्र}. | अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि), चित्त की वृत्तियों का निरोध |
| पूर्व मीमांसा (Purva Mimamsa)}. | जैमिनी}. | मीमांसा सूत्र}. | यज्ञों की प्रधानता, वेदों के कर्मकांड पर बल, धर्म का पालन, मोक्ष के लिए कर्म आवश्यक |
| उत्तर मीमांसा / वेदांत (Vedanta)}. | बादरायण (व्यास)}. | ब्रह्म सूत्र}. | ब्रह्म और आत्मा का अद्वैत, उपनिषदों का दर्शन, ज्ञान से मोक्ष |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| प्रवर्तक}. | चार्वाक (या बृहस्पति) |
| मुख्य ग्रंथ}. | बृहस्पति सूत्र (अब उपलब्ध नहीं) |
| प्रमाण (ज्ञान के साधन)}. | केवल प्रत्यक्ष (Perception) — इंद्रियों द्वारा प्राप्त ज्ञान ही सत्य |
| आत्मा}. | आत्मा शरीर के साथ नष्ट हो जाती है, कोई अलग आत्मा नहीं |
| भगवान}. | ईश्वर नहीं है (नास्तिक दर्शन) |
| पुनर्जन्म}. | पुनर्जन्म नहीं है |
| जीवन का लक्ष्य}. | सुख — भोग ही एकमात्र सत्य, "यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्" (जब तक जियो, सुख से जियो) |
| वेद}. | वेदों को अस्वीकार (नास्तिक दर्शन) |
📌 UPSC तथ्य: चार्वाक दर्शन एक भौतिकवादी और नास्तिक दर्शन है। यह प्रत्यक्ष (Perception) को ही एकमात्र प्रमाण मानता है। इसका प्रसिद्ध सूत्र है — "यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्" (जब तक जियो, सुख से जियो)।
जैन धर्म के प्रवर्तक ऋषभदेव (आदिनाथ) माने जाते हैं, लेकिन इसके वास्तविक संस्थापक वर्धमान महावीर (599-527 ई.पू.) हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| तीर्थंकर}. | 24 तीर्थंकर — ऋषभदेव (प्रथम), महावीर (24वें और अंतिम) |
| जन्म}. | कुंडग्राम (वैशाली के पास, बिहार), क्षत्रिय कुल, पिता — सिद्धार्थ, माता — त्रिशला |
| संन्यास}. | 30 वर्ष की आयु में, 12 वर्ष तपस्या, 42 वर्ष में कैवल्य ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्ति |
| उपदेश}. | 72 वर्ष की आयु में पावापुरी (बिहार) में निर्वाण |
| प्रमुख सिद्धांत}. | अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह — पाँच महाव्रत |
| कर्म सिद्धांत}. | कर्म पदार्थ है जो आत्मा से चिपक जाता है, तप से कर्म नष्ट होते हैं |
| मोक्ष}. | सिद्धशिला (ब्रह्मांड के शीर्ष पर) — सभी कर्मों से मुक्त आत्माएँ |
| शाखाएँ}. | श्वेताम्बर (सफेद वस्त्र) और दिगम्बर (नग्न) — दो मुख्य शाखाएँ |
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक}. | गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) (563-483 ई.पू.) |
| जन्म}. | लुम्बिनी (नेपाल), कपिलवस्तु के शाक्य कुल, पिता — शुद्धोधन, माता — महामाया |
| महाभिनिष्क्रमण}. | 29 वर्ष की आयु में घर त्याग, 6 वर्ष तपस्या |
| बुद्धत्व प्राप्ति}. | 35 वर्ष की आयु में बोधगया (बिहार) में पीपल के वृक्ष के नीचे |
| प्रथम उपदेश}. | सारनाथ (वाराणसी) में धर्मचक्रप्रवर्तन — पहले 5 शिष्य | महापरिनिर्वाण}. | 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) |
| चार आर्य सत्य}. | दुःख, दुःख समुदय (कारण), दुःख निरोध (निवृत्ति), दुःख निरोध मार्ग |
| अष्टांगिक मार्ग}. | सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाक्, कर्म, आजीवा, व्यायाम, स्मृति, समाधि |
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