UPSC प्राचीन इतिहास | परिपक्व काल: 2600 ईसा पूर्व - 1900 ईसा पूर्व
सिंधु घाटी सभ्यता एक बहुत पुरानी सभ्यता है जो लगभग 5000 साल पहले फली-फूली। इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं।
| वर्ष | पुरातत्ववेत्ता | स्थल | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1856 | रेलवे इंजीनियर | हड़प्पा | ईंटें मिलीं, लेकिन पहचान नहीं हुई |
| 1921 | दया राम साहनी | हड़प्पा | पहली बार सभ्यता के रूप में पहचान |
| 1922 | आर.डी. बनर्जी | मोहनजोदड़ो | "मृतकों का टीला" की खोज |
| 1931-34 | सर जॉन मार्शल | मोहनजोदड़ो | व्यापक खुदाई, पुस्तक प्रकाशित |
| 1940s | मोर्टिमर व्हीलर | हड़प्पा, मोहनजोदड़ो | "गढ़ी दुर्ग" की अवधारणा |
📌 याद रखें: हड़प्पा → दया राम साहनी (1921), मोहनजोदड़ो → आर.डी. बनर्जी (1922)
| शहर | आज कहाँ है? | नदी | प्रसिद्धि |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा | पाकिस्तान (पंजाब) | रावी | सबसे पहले मिला, 6 विशाल अन्नागार |
| मोहनजोदड़ो | पाकिस्तान (सिंध) | सिंधु | महान स्नानागार, पशुपति मुहर, नृत्य करती लड़की |
| लोथल | गुजरात (भारत) | भोगवा | दुनिया का सबसे पुराना गोदी (डॉकयार्ड) |
| धोलावीरा | गुजरात (भारत) | लूनी | 16 जलाशय, 3 भागों में विभाजित |
| कालीबंगा | राजस्थान (भारत) | घग्घर (सरस्वती) | अग्निकुंड, हल चलाया खेत |
| राखीगढ़ी | हरियाणा (भारत) | घग्घर | भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल |
| चन्हुदड़ो | पाकिस्तान (सिंध) | सिंधु | बिना गढ़ी वाला एकमात्र नगर, मनका कारखाना |
| कालखंड | समय | विशेषताएँ |
|---|---|---|
| प्रारंभिक हड़प्पा (Early Harappan) | 3300-2600 ई.पू. | गाँव, खेती, धीरे-धीरे शहर बनने लगे |
| परिपक्व हड़प्पा (स्वर्ण काल) (Mature Harappan) | 2600-1900 ई.पू. | ✅ शहर पूरी तरह विकसित, ✅ लिपि का उपयोग, ✅ दूर-दूर तक व्यापार |
| उत्तर-हड़प्पा (Late Harappan) | 1900-1300 ई.पू. | ❌ पतन शुरू, शहर छोटे हो गए, लोग गाँवों में रहने लगे |
📌 याद रखना: परिपक्व हड़प्पा काल (2600-1900 ईसा पूर्व) इस सभ्यता का स्वर्ण काल था - तब यह सभ्यता अपने चरम पर थी।
सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी उन्नत नगर योजना (Town Planning) थी। यह अपने समय की सबसे व्यवस्थित शहरी बस्तियाँ थीं।
गढ़ी (Citadel) नगर का सबसे ऊँचा और सुरक्षित भाग होता था। यह मिट्टी के ऊँचे चबूतरे (mud-brick platform) पर बना होता था।
📌 खास बात: धोलावीरा एकमात्र ऐसा स्थल है जहाँ 3 भागों में विभाजन है - गढ़ी (Citadel), मध्य नगर (Middle Town), निचला नगर (Lower Town)।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| आकार (Size) | 11.88 मीटर × 7.01 मीटर × 2.43 मीटर गहरा |
| निर्माण सामग्री | पक्की ईंटें, प्राकृतिक टार (Bitumen) से जलरोधी |
| सीढ़ियाँ | दोनों सिरों पर उतरने के लिए सीढ़ियाँ |
| जल निकासी | एक बड़ा नाला अतिरिक्त पानी निकालने के लिए |
| आसपास के कमरे | छोटे-छोटे कमरे (लॉकर रूम या विश्राम कक्ष) |
सिंधु घाटी की जल निकासी प्रणाली (Drainage System) अपने समय से बहुत आगे थी।
📌 UPSC तथ्य: मोहनजोदड़ो में लगभग 700 कुएँ मिले हैं — यह दर्शाता है कि जल आपूर्ति की उन्नत व्यवस्था थी।
📌 ध्यान देने वाली बात: घरों का डिज़ाइन बताता है कि लोग गोपनीयता और स्वच्छता को बहुत महत्व देते थे।
सिंधु घाटी सभ्यता का सामाजिक जीवन सुव्यवस्थित, समृद्ध और शांतिपूर्ण था। यहाँ किसी भी प्रकार के हथियारों या युद्ध के प्रमाण बहुत कम मिले हैं।
📌 UPSC तथ्य: सिंधु घाटी विश्व की पहली कपास उगाने वाली सभ्यता थी। अंग्रेजी का शब्द "Cotton" भी सिंधु से ही आया है।
| व्यापार भागीदार | आज का नाम | व्यापारिक वस्तुएँ |
|---|---|---|
| मेसोपोटामिया | इराक | सिंधु से: लकड़ी, हाथीदाँत, कार्नेलियन मनके, सूती कपड़ा मेसोपोटामिया से: चाँदी, टिन, लापिस लाजुली |
| दिलमुन | बहरीन | मध्यवर्ती व्यापारिक केंद्र |
| मगन | ओमान | तांबा |
| मेलुह्हा | सिंधु सभ्यता का मेसोपोटामियाई नाम | सिंधु घाटी को यही नाम दिया गया था |
| उद्योग | विशेषताएँ | प्रमुख स्थल |
|---|---|---|
| मनका निर्माण | कार्नेलियन, स्टीटाइट, जैस्पर, लापिस लाजुली के मनके | लोथल, चन्हुदड़ो |
| बर्तन निर्माण (Pottery) | चित्रित मिट्टी के बर्तन (लाल मिट्टी पर काले रंग के चित्र) | सभी स्थल |
| धातु कला | तांबा, कांस्य, सीसा, सोना, चाँदी की वस्तुएँ | मोहनजोदड़ो, हड़प्पा |
| मुद्रांकन (Seal-making) | स्टीटाइट की मुहरें, पशुओं के चित्र, लिपि | मोहनजोदड़ो |
| वस्त्र निर्माण | सूती कपड़ा (दुनिया में सबसे पहले) | मोहनजोदड़ो (सूती कपड़े के अवशेष) |
| लकड़ी का काम | लकड़ी के फर्नीचर, गाड़ियाँ, नावें. | लोथल, हड़प्पा |
📌 ध्यान देने वाली बात: खिलौनों और पासों का मिलना बताता है कि सिंधु घाटी के लोग खुशहाल जीवन जीते थे और मनोरंजन के लिए समय निकालते थे।
सिंधु घाटी सभ्यता के धर्म के बारे में अधिक जानकारी नहीं है, लेकिन पुरातात्विक साक्ष्यों से कुछ महत्वपूर्ण बातें पता चलती हैं।
| पूजा का प्रकार | प्रमाण/स्थल | विशेषता |
|---|---|---|
| मातृदेवी पूजा | सभी प्रमुख स्थल | मिट्टी की स्त्री मूर्तियाँ |
| पशुपति/शिव पूजा | मोहनजोदड़ो (मुहर) | योग मुद्रा, तीन मुख, पशुओं से घिरे |
| लिंग/योनी पूजा | कालीबंगा, लोथल | पत्थर के लिंग |
| वृक्ष पूजा | मोहनजोदड़ो (मुहरें) | पीपल के पेड़ की पूजा |
| अग्नि पूजा (होम/यज्ञ) | कालीबंगा, लोथल | अग्निकुंड (Fire Altars) मिले हैं |
📌 UPSC तथ्य: पशुपति मुहर पर बने व्यक्ति को प्रोटो-शिव (Proto-Shiva) कहा जाता है — यह बाद के हिंदू धर्म के शिव से संबंध माना जाता है।
सिंधु घाटी में कई प्रकार की दफन प्रथाएँ मिली हैं, जो मृत्यु के बाद के जीवन में विश्वास को दर्शाती हैं।
| दफन प्रकार | प्रमुख स्थल | विशेषता |
|---|---|---|
| पूर्ण दफन | हड़प्पा, मोहनजोदड़ो | शव पूरा फैलाकर |
| संकुचित दफन | लोथल, कालीबंगा | शव मोड़कर (भ्रूण मुद्रा) |
| युग्म दफन | लोथल (इकलौता) | पुरुष+महिला एक साथ |
| ताबूत दफन | हड़प्पा (इकलौता) | लकड़ी के ताबूत में |
| दाह संस्कार | हड़प्पा, मोहनजोदड़ो | अस्थियाँ मिट्टी के बर्तन में |
📌 UPSC तथ्य: नृत्य करती लड़की (Dancing Girl) और पुजारी-राजा (Priest-King) सिंधु घाटी की कला के सर्वोत्तम उदाहरण हैं।
सिंधु घाटी से 2,000 से अधिक मुहरें मिली हैं। ये मुहरें आमतौर पर स्टीटाइट (Steatite) पत्थर की बनी होती थीं।
| मुहर का प्रकार | चित्र/विशेषता | महत्व |
|---|---|---|
| पशुपति मुहर | योग मुद्रा में पुरुष, 3 मुख, पशुओं से घिरा | प्रोटो-शिव, धार्मिक महत्व |
| एक सींग वाला जानवर | Unicorn (एक सींग वाला जानवर) | सबसे आम मुहर, व्यापार में प्रयोग |
| स्वास्तिक मुहर | स्वास्तिक चिन्ह | शुभता का प्रतीक |
| वृक्ष मुहर | पीपल के पेड़ की पूजा | वृक्ष पूजा का प्रमाण |
| लिपि मुहरें | मुहरों पर खुदी हुई लिपि | व्यापार, प्रशासन, धार्मिक चिह्न |
| प्रकार | रंग/डिज़ाइन | विशेषता |
|---|---|---|
| लाल मिट्टी के बर्तन | लाल मिट्टी पर काले रंग के चित्र (Black-on-Red) | सबसे आम, ज्यामितीय और पशु चित्र |
| चमकीले बर्तन | चमकदार लाल रंग | धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयोग |
| गोलाकार बर्तन | गोल तल वाले | अनाज और पानी रखने के लिए |
| मानव और पशु आकार के बर्तन | मानव/पशु के आकार में | कलात्मकता का प्रदर्शन |
सिंधु घाटी की लिपि अभी तक पूरी तरह से नहीं पढ़ी जा सकी है। यही कारण है कि इस सभ्यता को प्रोटो-ऐतिहासिक (Proto-historic) काल कहा जाता है — लिखित साक्ष्य हैं लेकिन पढ़े नहीं जा सके।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल चिह्न | लगभग 400-600 |
| लिखने की दिशा | दाएँ से बाएँ (Right to Left) |
| लिपि का प्रकार | चित्रात्मक + ध्वन्यात्मक |
| सबसे लंबा शिलालेख | धोलावीरा (10 चिह्न) |
| वर्तमान स्थिति | अपठित (Undeciphered) |
📌 UPSC तथ्य: सिंधु घाटी की लिपि अभी तक नहीं पढ़ी जा सकी है। यही कारण है कि इस सभ्यता को प्रोटो-ऐतिहासिक (Proto-historic) कहा जाता है — लिखित साक्ष्य हैं लेकिन पढ़े नहीं जा सके।
सिंधु घाटी सभ्यता लगभग 1900 ईसा पूर्व के आसपास पतन की ओर बढ़ने लगी। वैज्ञानिकों ने कई सिद्धांत दिए हैं:
📌 UPSC तथ्य: आजकल अधिकांश विद्वान जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और सरस्वती नदी के सूखने को पतन का मुख्य कारण मानते हैं। आर्य आक्रमण सिद्धांत अब विवादित है।
सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद, कई क्षेत्रीय संस्कृतियाँ विकसित हुईं:
| सभ्यता | क्षेत्र | नदी | समय |
|---|---|---|---|
| मिस्र सभ्यता (Egyptian) | मिस्र (उत्तरी अफ्रीका) | नील नदी (Nile).\] td>3100-332 ई.पू. | |
| मेसोपोटामिया सभ्यता (Mesopotamian) | इराक (मध्य पूर्व) | टाइग्रिस-यूफ्रेट्स.\] td>3500-500 ई.पू. | |
| चीनी सभ्यता (Chinese) | चीन (पूर्वी एशिया) | पीली नदी (Yellow River).\] td>1600 ई.पू. से | |
| सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley).\] td>भारत-पाकिस्तान.\] td>सिंधु-सरस्वती\] td>2600-1900 ई.पू. |
📌 UPSC तथ्य: सिंधु घाटी सभ्यता क्षेत्रफल में सबसे बड़ी थी (12-15 लाख वर्ग किमी), जबकि मिस्र और मेसोपोटामिया छोटे थे।
📚 Continue Learning: